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Ebook Suvarnalatha by Ashapurna Devi read! Book Title: Suvarnalatha
The author of the book: Ashapurna Devi
Edition: Current books
Date of issue: November 2007
ISBN: No data
ISBN 13: No data
Language: English
Format files: PDF
The size of the: 15.16 MB
City - Country: No data
Loaded: 1927 times
Reader ratings: 5.9

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सुवर्णलता - हिंदी
अनुवादक - हंस कुमार तिवारी
मेरे माता-पिता बंगाली हैं, जाहिर हैं की फिर मैं भी तो बंगाली हुआ ना? दरअसल पापा की नौकरी भोपाल में लग गयी, BHEL में, और हम लोग वोही के हो गए| मेरा जनम भोपाल में ही हुआ और विधालय की पढाई भी यही भोपाल में ही हुयी 12th तक. MP Board में अंग्रेगी मीडियम में पढाई करी, लेकिन हिंदी का स्तर बहुत ऊँचा रहा हमेशा. हिंदी पाठ्य पुस्तक निगम भोपाल की ही हिंदी किताबें ही मेरे Convent स्कूल में चलती रही. हिंदी की शिक्षक भी बहुत अच्छी मिली. श्रीमती सरोज , PHD थो वोह. उनका हिंदी पराने का रोचक ढंग और भोपाली हिंदी का प्रभाव कहिये, हिंदी हमेशा से ही प्रिय रही.
बंगाली माता-पीता बंगाली साहित्य के बहुत प्रशंशक थे, लेकिन हम ठहरे बंगला में बिलकुल कोरे! टूटी-फूटी बंगाली बोल लेते थे घर में, लेकिन बंगाली पड़ना तो बहुत दूर की बात थी. बंगला के प्रति एक कौतुक हमेशा रही.
इसी से जब माता-पीता को जी-बंगला पर स्वर्णलता-बंगला सीरियल देखते देखा, तो कौतुहल्वस मन में इच्छा हुयी इस किताब को पड़ने की. यहीं landmark में यह किताब- हिंदी में दिख गयी और मैंने लपक लिया| इस किताब की स्तुति में जितना भी लिखा जायें कम होगा| मैंने इसे मात्र १ सप्ताह में पड डाली, पड़ते वक़्त मैं कलकत्ता भ्रमण में निकला हुआ था| एक दोस्त की शादी थी यहाँ|
आशापूर्णा देवी ने (1920 - 1950 का बंगाली भारतीय समाज) कोलकाता का बहुत सुन्दर चिंत्रण किया हैं, एक joint family में बालिका-बधू बनकर आयी ९ वर्षीया सुवर्ण की कहानी हैं यह| और उसकी पुराने ख्यालों वाली सास मुक्तकेशी | मानव मन को पकरना कोई इस लेखक से सीखे | कई भिन्न-भिन्न पात्र , और हर एक की अपनी अलग मनोदशा (phychology) कितना सुन्दर, कितना प्राकृतिक| हर एक पात्र की कहानी पड़कर लगता हैं की हाँ यही तो हुआ होगा, यही तो होना चाहिए, ऐसे लोग ऐसा ही तो आचरण करते हैं, ऐसा ही तो सोचते हैं |
मनोरम लेकिन मन तो चीरते हुयी, अकेली सुवर्णलता की एकाकी संघर्ष-गाथा, सच्चाई के लिए, तर्क के लिए, जो उचित हैं उसके लिए, इस कुत्षित समाज के विरोध में | क्या सुवर्ण की आखिर जीत हुयी? क्या हमारे समाज में ऐसा होता हैं?
इसको फिर एक बार पड़ने की इच्छा हैं, अभी इस series का पहला अंक पढ़ रहा हू (प्रथम प्रतिश्रुति- हिंदी ), इसमें सुवर्ण की माँ सत्यवती की कहानी हैं (1850 - 1920 का बंगाली भारतीय समाज)
ऐसी मार्मिक कहानी का कोई युग-भाषा-स्थान-जाती नहीं होती. आशापूर्णा उन महान लेखको में से हैं (तोल्स्तोय, तागोरे, dicken ) जिनकी कहानी हर जगह, हर युग में सदैव सार्थक रहेंगी!


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Ebook Suvarnalatha read Online! Ashapurna Devi (Bengali: আশাপূর্ণা দেবী), also Ashapoorna Debi or Asha Purna Devi, is a prominent Bengali novelist and poet. She has been widely honoured with a number of prizes and awards. She was awarded 1976 Jnanpith Award and the Padma Shri by the Government of India in 1976; D.Litt by the Universities of Jabalpur, Rabindra Bharati, Burdwan and Jadavpur. Vishwa Bharati University honoured her with Deshikottama in 1989. For her contribution as a novelist and short story writer, the Sahitya Akademi conferred its highest honour, the Fellowship, in 1994.




Reviews of the Suvarnalatha


JACK

It reads on one breath.

JAMES

The book has disappointed, little new, lots of water!

MOLLY

Why is she out! It must be endless!

HENRY

I recommend it.

AMELIA

Another one-time book




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